काश!
कई सवाल थे उसकी आंखों में ,
जो आंसू बन बह जाते थे ,
हर बार उसे वे बस तेरी ही याद दिलाते थे ।
हर पल पर तुम्हें याद कर तड़प रही थी
जी कर भी वह हर पल मर रही थी
अपनी जरूरतें दबा तेरी इच्छाओं को निभाया था ,
अरे ! अपना पेट काटकर तुझको खिलाया था ।
हर मुश्किल को सह जाती थी r
फिर भी चुप रह जाती थी।
तुम तो अपनी ही दुनिया में मग्न थे,
हम पर तो टूटे मुसीबतों के कई गगन थे ।
तुम तो संपत्ति के पीछे भाग रहे थे,
"जमाना बदल गया है"जैसे बहाने जता रहे थे ,
"तुम्हें क्या पता" के ताने सुना रहे थे ।
क्या संपत्ति से सम्मान है?
हम को दूर कर कर भी तू महान है?
काश एक बार आंखें आंखों में डाली होती ,
एक बार साथ ले जाने की ख्वाहिश जताई होती
काश एक बार पीछे मुड़कर देखा होता ,
काश कुछ कहा कुछ सुन लिया होता
काश हम से दूर जाते समय कुछ सोच लिया होता ,
बस एक बार ही अपनी बंद आंखों को खोल लिया होता ,
काश जीसकी बाहों में जन्म लिया उसे यू मरने न दिया होता , उसकी आंखों को बस एक बार पढ़ लिया होता ।
काश.....
तो आज ये आलम ना होता
उसकी आंखों में वह मातम ना होता
वह जिंदा होती
उसकी फोटो पर वह फूलों का हार ना होता.....