मै मा हूँ बहिन हूँ बेटी हूँ बुआ हूँ काकी हूँ मौसी हूँ मामी हूँ दादी हूँ नानी हूँ पत्नी हूँ दोस्त हूँ मै काली सरस्वती लक्ष्मी दुर्गा हूँ इस संसार मे कहाँ नही हूँ मुझसे कितने रिश्तो मे बंधा तू फिर भी तू मुझे भोग्या समझता है ललचाई आंखो से भेड़िये की तरह देखता है, अरे दुष्ट मुझे पहचान मेरे बिना तू इस संसार मे नही आता । मै तेरी सारी अभिलाषा पूरी करती हूँ बदले मे सिर्फ रिश्तो की मर्यादा चाहती हूँ तू नर पिशाच मत बन,असुर मत बन मेरी ममता रूठ गयी तो रण चंडी बन तेरा शैतानी सिर काट काट कर मुंडमाल पहनूंगी। सुधर जा अपनी नजरे सुधार ले, 21 सदी मेरी होगी मै हर जगह पर अधिकार लिए रहूंगी, बस अब छोड़ नौटंकी बन जा राम शिवा रणजीत सिंह
✍कैप्टन
#WomensDay