फिर कभी ना मिलूंगी
कुछ देर बाद ऐसा लगता है कि हम क्यों ऐसे इंसान से मिलते है जिन्हें सोच नही होती, शायद ये सिखाते है की कितने बुरे होते है लोग, लेकिन ऐसे लोगों का सामना करने के लिये हम अपनी अच्छाई क्यों छोड़ दे,
कुछ ऐसेही सोच अपने दिमाग मे लिए में बरामदे में बैठी थी, थोड़ी देर में उस cafe की याद आ गयी जहा हम दोनों घंटो बैठ बातें करते थे , सोचा चली जाऊ,
थोड़ी देर बाद वहां पहोंच भी गयी वापस उसी table पे वही coffee order की कॉफी का एक घूँट लेते ही याद आ गया उसका बचपना चाहता था कि में उसके अलावा किसी और को देखु भी नही, सिर्फ मेरी हो , और भी बहोत कुछ कड़वी बातें सिर्फ मुझे हासिल करना चाहता था, में क्या चाहती हु इससे कुछ मतलब ही नही था, प्यार तो बेइंतहा था लेकिन तंग आ गयी थी बिना मतलब के सवाल का जवाब देते देते,
कुछ future दिखाई ही नही देता था इस relation में....,
फिर एकदिन खुदसे ही एक वादा किया ,
"में तुझे फिर कभी ना मिलूंगी
इंसान चाहे प्यार कितना भी अंधा हो,
लेकिन अपने आप को कभी भी भुलना नही चाहिये,
चाहे कितनो से छुपाना पड़े अपने आप से सच नही छुपाना चाहिए,
कई बार इंसान फिर से गलती कर बैठता है लेकिन बार बार नही करनी चाहिए,
इसलिए में तुझे फिर कभी ना मिलूंगी......,"
जितनी चाहे जिंदगी बिगड़ जाए पर संभलना आना चाहिए,
हालात कैसे भी हो लड़ना चाहिए,
ये सीखकर में हँसी के साथ कैफ़े से बाहर आ गयी ,
अब ना कोई पछतावा था ना कोई गम था,
थी तो एक beautiful smile, और एक बहोत खुशहाल ज़िंदगी जिसे अब में अपनी मर्जी से जी सकती थी.......,😊😊