ए जिंदगी क्यू तु जिन्दगी सी कम और पहिलियो सी ज्यादा ही।
चाहे जवाब हो न हो लेकीन , लाइन सवालों की ज्यादा हे।
चाही थी खुशियां लेकिन, बारिश गमों की ज्यादा हे।
क्यू तु जिन्दगी सी कम और पहिलियो सी ज्यादा हे?
धूप निकली तो हे कही से लेकिन, सुकून की कम और बेचैनियो की ज्यादा हे।
आज कल हाथो में भी जैसे, लकी re आसूओ की ज्यादा हे।
क्या कहूं किसिसे मे , जब मेरी ही मुस्कुराहट के पीछे बात मायूसियों की ज्यादा हे
अब तो बता ये जिंदगी ,
क्यू तु जिन्दगी सी कम और पहिलियों सी ज्यादा है।✒️®Vएल©™