मेरा दिल कोई खिड़की नहीं ................
जो एक हवा के इक झोंके संग यूँ ही बहक जाए,
ये तो वो अथाह समंदर है जिसकी थाह न हर कोई ले पाए ।
दिलों के झरोखे से हसीनाओं को ख़ूब निहारा होगा तुमने
पर ये मेरा दिल है इसके कपाट यूँ ही नहीं खोल पाओगे
ग़र खुल गए दिल के पट तेरे लिए , तो वापस न लौट पाओगे ।