आज वर्तमान समय की परिस्थितियों को देखकर उम्मीद नहीं है कि जो मैं चाहता हूं उसे हासिल भी कर पाऊंगा वैसे कई लोगों से सुना हूँ, पुस्तकों में भी पढ़ा हूं कि इंसान को उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए और मैं इस बात से सहमत भी हूं परंतु जीवन में कुछ ऐसी घड़ियां आती है जब इंसान काफी टूट जाता है।