जब बर्बादी की कहानी अपनी खुद ही लिखते गए
तो अब किसी और को इल्ज़ाम देकर क्यों गुनाह करें
दिल में हैं। जो ख्वाहिश वो तो कब का दम तोड़ गयी।
अब दिल में नई ख्वाहिशों को क्यों जगह करें
थकती हैं। उम्र खुद ही वक़्त आने पर
हम बेतमतलब की चिंताएं क्यों करें
jitin tyagi