Hindi Quote in Quotes by Kamal Bhansali

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शिर्षक: दलदल

खुद को खुद से न जाना, ये ही एक बड़ी भूल हुई
तमाम उम्र जिंदगी,अपनी ही कमियों से परेशान हुई

शक्ल-सूरत में खोया जिस्म, आईना निहारता रहा
अंदर में कभी न झाँका, आत्मा का क्या हाल रहा ?

निज-खुशियाँ तारों की तरह जेहन में टिमटिमाती रही
दुआओं के संसार मे, आत्मा सदा सकपकाती ही रही

दया, धर्म, प्रेम सदा वाणी की खुशबू बन महकते रहे
यथार्थ में वो देह को, दुनिया के लिए सिर्फ सजाते रहे

उम्र सदा आज की मौहताज होकर, कल से दूर रही
अवश्यभावी है, मृत्यु, ये सोच सदा पल की ही रही

क्या कहूँ ? मोह के सँसार में अकेला हूँ, न सोचा कभी
अपने-पराये के दलदल में ऐसा फँसा, न निकला कभी

मिला जन्म उधार का, न समझ पाया भोला सा मन
कण-कण में बिखरी वासना का, आँगन बन गया तन

अंत में तन-मन सब जले, कोई भी रिश्ता सँग न चला
आत्मा की न सुनि कभी, फिर भी उसका साथ मिला

"कमल" सँसार कुछ भी नहीं, सिर्फ एक दलदल है
खिला तूँ उस में, उभर जा, प्रभु, तेरी अंतिम मंजिल है

✍️ कमल भंसाली

Hindi Quotes by Kamal Bhansali : 111757324
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