प्रेम का निष्कर्ष तो नहीं होता।
ये अंतहीन होता है।
निष्कर्ष होता तो कैसे लिखी जाती कविताएँ?
कहानियाँ? उपन्यास? अनकही कहानियाँ?
निष्कर्ष होता तो होती प्रमेय, माप लेते प्रेम को किसी पायथागोरस प्रमेय से, या कमेस्ट्री के किसी फॉर्मूले से, या फिजिक्स के E=mc स्कवायर से 🧡