मेरी रंगीन दुनिया को क्यों बेरंग कर बैठे
जहा तक थी पहुच तेरी वह तक भंग कर बैठे
पकड़ कर हाथ चलते हो कही भूले मुसाफिर हो
जो भटके तो यह कैसे किसी का साथ देते हो
जहा कस्ती थी ठहरी वही तो मस्त जवानी है
जवानी में जवा रातों में रंगीन कहानी है
मेरी रंगीन दुनिया को क्यों बेरंग कर बैठे
जहा तक थी पहुच तेरी वह तक भंग कर बैठे
-@njali