मौत को गले लगाना सीखो
हो सके तो मुस्कुराना सीखो।
सूरज की तपन है जिंदगी में
इनसे भी नजरें मिलाना सीखो।
ज़रूरी नहीं रात चांदनी ही रहे
अंधेरों को अब हराना सीखो।
हर्ट करती है इगो बात बात में
बातों से इसे हटाना सीखो।
किसी के कितने - कितने हो आप
परिस्थिति में पहचान कराना सीखो।
गर चाह है तरक़्क़ी की "दरिया"
तो तुम भी नंबर बनाना सीखो।
-रामानुज दरिया