स्वामी रामतीर्थ ने अपने प्रवचनों में कहा है "आनन्दमयी बनो और कालजयी बनो" । उनका कहने का सारांश है जो दुसरो को सुखी बनाता है, उससे उसके आनन्द का विस्तार हो सकता है।उससे प्राप्त होने वाली खुशियाँ उसको, सबके दिलो सम्मान दिलाती है और वह सदा याद किया जाता है।
इसलिये वो कालजयी यानी मृत्यु पर विजय पाने वाला बन सकता है| इस शिक्षा का सबसे ज्यादा सदुपयोग ईशवर चन्द्र विद्यासागर ने अपने जीवन में किया | वो खुद कोई ज्यादा आर्थिक सक्षम नहीं थे पर वे आर्थिक ,शारीरिक और मानसिक सहयोग इस तरह से दुसरों का करते की सहयोग पानेवाला समझ ही नही पाता की उस पर किसी ने अहसान किया| मेरे हिसाब से वो सही मानव संत थे और आनन्दमयी, कालजयी थे| लेखक✍️कमल भंसाली
-Kamal Bhansali