ये सब जो हो रहा है। ये बस गज भर की कहानी है।
ना तेरी है। ना मेरी है। ये तो आनी जानी है।
क्या सिकंदर क्या कलंदर सबको ही रहना है एक दिन गज भर के अंदर।
फिर उम्र की क्या बात हो कैसी जवानी है।
बस गज भर की कहानी है।
ठीक है जब तक वो था सुडौल था,एक पल को उसका भी खून खौलता।
वो सख्श करने लगा था। उम्र तेज थी वो भी कहा रुकता किसी न किसी पर वो मरने लगा था।
गुमान कैसे हुआ उसे ये जानते हुए।
एक पल को सांस भी अपनी नही है ये।
ये दौलत ये शोहरत सब कब्र तक ही जानी है।
गज भर की कहानी है।......
क्या मीर,गालिब,लैला,मजनू,तुलसी,कबीर,राम,कृष्ण,रहीम,करीम,इन संभावनाओं से अनजान थे,
नही, वो बस जरा हैरान थे,सोचते थे कि कौन है ये लोग और क्या इनकी क्रियाएं है। रहना खाना और सो जाना एक कमरे में हो सकता है।
फिर उन्होंने मिलकर इतने मकान क्यूं बनाए है।
सबको पता हकीकत फिर भी उसकी दुनिया इतनी अनजानी है।
गज भर की कहानी है। ......
सुनामी एक ही काफी है तेरा मंजर बदलने को
ये सारे सामान उठाने की भी जरूरत न होगी
कुछ यूं बहा ले जाएगी वो अपने संग तुझे।
मगर तू एक हकीकत मान एक दुनिया बनानी है।
जो बस इतनी ही हो,तेरा सामान हल्का हो,क्योंकि वो कब्र तक जानी है।
गज भर की कहानी है।