शीर्षक : मुक्तक (चिंतन के)
महज इतफाक, जिंदगी की दास्तां नहीं लिखते
बिना- मंजिल के कदम, हर राह पर नहीं बढ़ते
सोच कोई भी हो, परिणाम की हकदार होती
तेल कोई भी हो, दीये से, सिर्फ रोशनी ही होती
कल, हालात के लिए, वफ़ा को गिरवी नहीं रखता
लेखा- जोखा किया परिणाम, सही फल नहीं देता
मिलन में तड़प न हो तो, सिर्फ दस्तूरी निभाव होता
सीने में जलन न हो तो, जख्म में दर्द का अभाव होता
कौन है हम ? ये सवाल सदा उत्तर का मोहताज होता
भटकाव है, जीवन, कहने में, संतोष का अनुभव होता
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali