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कुछ बिखरे हुए अल्फाज़ को संजोके रखा है
वो गुजरी थी कभी पास से , खुशबू को दिल में रखा है।
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नाम पूछा नहीं था हमने, पहचान नहीं थी उतनी
सूरत भी याद नहीं, वो मेहमान बनी नहीं उतनी
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याद है तो बस इतना, उसका इत्तफाक से आना
इत्तेफाक से ही हमसे, पलभर बस नजर मिलाना
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अब मुलाकात फिरसे, क्या मुमकिन कभी होगी ?
मासूम सी खता कोई, मुहोब्बत भरी फिर होगी ?
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अंदाज नहीं, आगाज नहीं, आहट नहीं, आवाज नहीं
क्या है ना जाने अनजाना,परवाने का कोई राज़ नहीं
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हो मुक्कमल तकदीरे सबकी, ऐसी भी कोई बात नहीं
बस दुआ, एक सपना, उम्मीद भरा, दामन अपना
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हो जाए बस कुबूल, दिल की गहराई का नगमा
खूबसूरत सा नसीब, गले लगा ले सबको अपना।
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