जब पतंग अपनी ऊंचाई पर होती है
तो उसे और ऊपर ले जाने के लिए मांझे को छोड़ा नहीं जाता!
बल्कि उसे पकड़े रख कर, कभी ढील तो कभी कस कर और ऊपर ले जाने की कोशिश होती है।
ज़िंदगी में भी ऐसी ही एक पतंग की तरह है
बस ज़रूरी है एक ऐसे ही मांझा पकड़ने वाले का होना।