धड़कने बेताब हो जाती हैं तुम्हारी आहट सुनकर।
ज़रा संभल संभल कर आया करो
यूँ न तुम उदास रह के खुद को सज़ा दो
मेरी ख़ातिर ही सही गुनगुनाया करो
जरूरी नहीं कि मैं मिलूं तुम्हें जनम जनम
लेकिन मिलो तो गले लगाया करो।
एतिहातन मैंने भी दिल को समझा लिया है फिर भी
कभी राह में मिल जाएं तो रुक जाया करो।
नसीब अपना अपना है कौन किसे मिलता है
जब भी तुम्हें गम मिले मुझे दे जाया करो
आखिर प्रेम का मतलब त्याग भी होता है।
दिल को यही समझाया करो।
ज़रा सी याद आती है तो पलकें भीग जाती हैं।
तुम्हें मेरी कसम है"अर्जुन" मुस्कुराया करो।