शीर्षक: दोस्तों, कहाँ हो ?
दोस्तो, कहाँ हो ?, जिंदगी वहीं , तुम जहाँ हो
बदलते परिवेश में, सिर्फ आस्थाओं की राह हो
कल की चाहत में, साथ तुम्हारा ही चाहिए
रिश्तों की माला के बीच, एक मोती चाहिए
सम्पर्क सूत्र के युग की, तुम सीढ़िया बन गए
सफलता के रण-स्थल में, तुम सारथी बन गए
आवाज दूँ, तो तुम विश्वास बन उभर आते
संकटमोचन हुनमान के, सदृश्य नजर आते
युग बदले, दोस्त न बदले, तो कोई गिला नहीं
"कमल" ये सिर्फ सोच है, कोई सिलसिला नहीं
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali