शीर्षक: दुनियादारी
दुनियादारी एक खराब दशा है
जिसने निभाही वो ही फंसा है
कहतें इसके बिना संसार नहीं चलता
मायावी इसका जहां हर कोई फसता
सोने की नगरी सी होती, इसकी चकाचोंध
मृगया तन दौड़ता रहता करने, इसका प्रबंध
किस्से इस नगरी की होती, ऊंची दुकान
मिलते जहाँ स्वादिष्ट, बासी, फीके पकवान
रस्में, दस्तूरों से सजती रहती है दुनियादारी
कमी हुई तो समझलों फजीहत होती भारी
क्या, क्या सुनाऊ इसकी भूली बिसरी दास्तां
भाग्यशाली है वो, जिसका न पड़े इससे वास्ता
लेखा जोखा दुनियादारी का इतना ही रखे याद
किया हो, किसी पर कोई अहसान, न रखे याद
✍️कमल भंसाली
-Kamal Bhansali