कद्र इंसान की नहीं पैसों की होती हैं,
जिंदगी में इतना पैसा तो जरूर कमाएं,
की लोग आप की इज़्ज़त करना कभी ना भूले ।
बेशक पैसा काग़ज़ के समान हैं,
लेकिन दुनिया इसी की कद्रदान हैं l
बहुत सुना हैं लोगो से, पैसों से चैन और सुकून नहीं खरीदी जा सकती, लेकिन चैन और सुकून दो पैसा घर में आने से ही बनी रहती हैं l लोग कहते हैं मत भागों पैसों के पीछे, सब कुछ यही रह जाना हैं, अगर आपके घर में कोई बीमार पड़ जाए और पैसों की ज़रूरत हो तो वही लोग मुंह फेर जाएंगे, ज्ञान तो सब देते हैं देना हैं तो क्या पैसों से साथ दे पाओगे, जबकि लेकर तो आप भी नहीं जा पाओगे l
कहते हैं दुनिया पैसों के पिछे भाग रही हैं, यह सच हैं अगर वो नहीं तो इंसान का वजूद नहीं, पेट भरने के लिए तो तीन वक्त का खाना काफी हैं लेकिन जीने के लिए सिर्फ पेट भरना काफी नहीं हैं, अकेला पेट तो….......पैसों को लोग क्यूं इतना अहमियत देते हैं, क्यों लोग पैसा-पैसा करते हैं, जनाब पैसों का अहमियत हमारी जरूरत से बढ़ी हैं, जिस दिन लोगो की ज़रूरतें पूरी हो जायेगी उस दिन पैसों को कौन याद रखेगा भला ।
कहते हैं पैसों का लोभ मौत के करीब ले जाता हैं, जरा पूछे उस रिक्शे वाले से, जो उसी पैसों के लिए लोगो को दिन भर यहा से वहा ढोता हैं, मौत कब आनी हैं इसका अंदाजा तो उसे भी नहीं हैं लेकिन इतना तो पता हैं अगर वो पैसे न ले जा पाएं तो उसके बीवी बच्चे भूख से तड़प कर मर सकते हैं ।
पैसों से जिंदगी नही हैं बल्कि पैसा हैं तो जिंदगी हैं, सिर्फ पेट भरना काफी नही हैं, सिर पर छत होना भी लाजमी हैं, गुज़ारा तो सड़को पर भी किया जा सकता हैं ।
खुद की मेहनत पर विश्वास रखो, जितना हो सके उतना कमाओ लेकिन कभी किसी का दिल न दुखाओ।
मेहनत से अपनी पहचान बनाओ, बस यही सबक आगे लोगो तक पहुचाओ।
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