योग और खुशी
तनावग्रस्त मानव
खो देता है स्वयं पर नियंत्रण
नही पहचान पाता है
विपरीत परिस्थितियों को
हो जाता है दिग्भ्रमित
बदल जाता है उसका व्यवहार
दूर होते जाते है उसके अपने
चिंता ले जाने लगती है
उसे चिता की ओर
तब उसे आवश्यकता होती है
तनाव से मुक्ति की
भारतीय दर्शन ने
इसके लिए दिया है योग।
येाग एक माध्यम और साधन है
तनाव से मुक्ति का
इससे बढती है
चिंतन, मनन और निर्णय लेने की क्षमता
यह दिखलाता है
जीवन में सफलता का रास्ता।
इसीलिये कहते है येाग करो
स्वयं भी खुश रहो और
परिवार को भी खुश रखो।