दोस्ती
न तख्त है
न ताज है
बस दोस्तों का साथ है।
कोमल सुमन है देास्ती,
शीतल पवन है दोस्ती।
है तरल सरिता दोस्ती,
पूजा की थाली दोस्ती।
बिछुडे अगर हम दोस्त से
तो दोस्ती कायम रहे।
होंठो पे हो मुस्कान
अपनी आँख चाहे नम रहे।
क्या पता किस मोड पर
शायद कभी मिल जाए हम।
तब काम शायद आ सकें
कठिनाई हो या कोई गम।
ऐसी दोस्ती रखे हम l