लोकतंत्र एडोल्फ़ हिटलर की नज़र में ।
एक रोचक किस्सा है।एडोल्फ़ हिटलर की अपने कमाण्डरों के साथ विशेष मीटिंग थी।सभी कमाण्डर मीटिंग रूम में हिटलर का इन्तजा़र कर रहे थे।हिटलर आए तो उनके हाथ में एक मुर्गी थी। हिटलर उसके पंख नोचने लगा वो पंख नोचता और मुर्गी दर्द से चिल्लाती रही । हिटलर ने उसे एक कोने में फेंक दिया और अपनी जेब में से कुछ दाने निकाल कर उसके सामने फेंक दिए और कुछ दाने अपने पैरों के पास गिरा लिए । मुर्गी अपने सामने पडे़ दाने खाकर उसके पैरों के पास गई और वो दाने खाने लगी।सभी कमाण्डर हैरान थे कि आखिर हिटलर क्या करना चाहता है।हिटलर ने हँसते हुए अपने कमाण्डरों से कहा कि ये है लोकतंत्र ।पहले जनता को सताओ और फिर सांत्वना के लिए कुछ दाने फेंक दो ।प्रजा दुम हिलाती आ जाएगी ।
अनन्त कुमार व्यास
बीकानेर राजस्थान