**प्रतियोगिता के लिए रचना*
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*विषय:अलमारी में रखें पुराने खत*
**वो भी एक बेमिसाल जमाना था**
( मुक्तछंद काव्य रचना )
अलमारी में रखें पुराने खत ,
बीतें जमाने की याद दिलाते है।
प्रेम से भरे वो लफ्ज आज भी ,
मन में खुशियों की उमंग भर देते है।
क्या वो भी एक बेमिसाल जमाना था,
तब दिलों दिलों में प्यार का आशियाना था।
मिल जुलकर रहते थे तब लोग यहां,
और हर रिश्तों में प्यारा अपनापन था।
दूर रहकर भी एक दूसरे से कितना,
फिर भी उस हृदय में प्रीत का बंधन रहता था।
मिलते थे कई सालों बाद फिर भी,
प्यार वहां कभी न कम होता था ।
जब भी आता था अपनों का खत,
उसी खत में जैसे अपनों का चेहरा दिखता था।
जैसे ही हालात थे,उसी दिनों में मगर,
वो आंगन हरपल खुशियों से भरा रहता था।
बदल गया वो दौर ना जाने क्युं यहां?
ये कैसा नया दौर अब यहां चल रहा है।
आ गयी कैसे सब रिश्तों में दुरियां,
और ये इन्सान सिर्फ धन के पीछे भाग रहा है।
अलमारी में रखें वो पुराने खत ,
बीते जमाने की याद दिलाते हैं ।
प्रेम से भरे वो लफ्ज आज भी ,
नैनों से अश्क बहाकर चले जाते है।
मिलिंद क.महा.लातूर.
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