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हास्य रस
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बहुत गड़बड़ झाला है
बनठन समाजसेविका ने मिलकर एक न्यारा नारी कल्याण क्लब बनाया,
सब ने मिलकर सेविका बन नारी न हारी का बीड़ा उठाया।
नारी सब ,सभा ,संगोष्ठी ,संवाद ,बड़ा चढ़ा संवाद करने लगी,
सुन्दर माला, सुन्दर बाला,सुन्दर परिधान पहन छाने लगी।
अपना बुटीक ,अपना कोचिंग अपना व्यापार चलाने लगी।
नारी कल्याण की छाँव मे खुब धन क्लब से अब बटोर ने लगीं,
सुन्दर प्यारे अनोखे महंगे समान का सब मेला लगाने लगीं।
जो नारी क्लब मे नारीव्यापारी मंडल से समान खरीदार न होती,
नारी व्यापाररी अब नारी कल्याण क्लब सदस्य मिलकर उस पर सभा बुलाती।
सारी कमियां उस पर मणकर सभागार मे सब नारी व्यापारी मिल खुब सताती,
माफ करो हाथ जोड़कर सब को कहतीअपनी रो रो व्यथा बताती।
बनी नारी सेविका के सब फोन पर ही क्लब के सारे काम काज हो जाते,
नारी कल्याण के बहाने दो चार काम कर मीडीया मे भी आ जाते।
अध्यक्ष पद की चाह मे आपस मे पीठ पीछे धोखा धड़ी हो रही,
सामने जब मिलते सभागार मे खुब मीठी बाते घुल मिल हो रही।
पार्लर से सुन्दर सुन्दर बन जब सुन्दरी सभागार मे आती,
अपनी ही धुन मे रहकर नारी के विकास की बाते बतियाती।
भाड़ मे जाए तेरा महिला कल्याण दुखीया ने क्लब से बला छुड़ाई,
सेवा का बीड़ा यों भुना जा रहा आपस मे चुना लगा पीछे से आवाज आई।
महिला कल्याण क्लब सेवा के नाम कर रही अपनो सेवा,
गरीब महिला को कुछ नही मिलता ये सब खाती हैं मेवा।
बहुत बहुत नारी क्लब नारी कल्याण मे हो रहा बहुत गड़बड़ झाला है,
अब नारी सच में सब पर भारी,मत कहो नारी तो अबला है।
रश्मि ने देखा वाह-वाह नारी कल्याण का अनोखा नारी क्लब महान,
हाथ जोड़कर भाग खड़े हुए नारी ही नारी पर भारी फिर है नादान।
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डॉक्टर रश्मि शुक्ला