**ऐॆसी होती है बेटियां**
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( मनहरण घनाक्षरी )
बेटी कली आंगन की
बेटी खुशी जीवन की
वो प्यारी रिश्तों की डोर
बनके रहती है ।
बेटी आंगन की शोभा
बेटी जीवन की आभा
वो बनके दीप ज्योति
हमेशा जलती है ।
बेटी प्रेम का सागर
बेटी अनूठा संस्कार
वो मान सम्मान से,
रिश्तों को जपती है।
ऐॆसी होती है बेटियां
फूल होती है बेटियां
हर रूप में ढलती
बेटी ही संसार है ।
मिलिंद क.महा.लातूर.