लौट कर सब आते है इस जहां में
हम नहीं पाते है यहां पे...!
आत्मा तो वहीं की वही लौटती है
पर कर्म आधीन मुखोटे बदल जाते है..!!
मनुष्य डरे पाप करने से इस आश्रय से
स्वर्ग और नर्क की व्याख्या दर्शायी गयी है..
वास्तव में स्वर्ग भी यही धरा पर नर्क भी यही धरा पर है
मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल यहां पाता है..!!
#आर्यवर्त