तेरे साथ गुज़रे हर लम्हे को
मेरा आंखों देखा एक सपना बना गया
कभी हँसा गया बेहिसाब मुजे तेरी यादों में
तो कभी हद से ज़्यादा रुला गया
दिल करता है कुर्बान हो जाउ उस शख़्सकी हाथो की उन लकीरो पर
जो बिन मांगे तुजे उस रब से अपना बना ले गया
-PUNIT SONANI 'ALFAAZ'