क्या खोया क्या पाया
नहीं पता है किसी अपनेको...
अपनी स्वार्थ की रंजिशों में
हम सदा बड़े मशगूल रहे..!!
जंग औरों और गैरो से क्या
अपने ही जंग का ऐलान कर गए
ना इंशानियत निभायी, ना कर्म
संजोए सारे ही रिश्ते पल में भूल गए
क्या निभाएंगे वादे वफ़ा के
जाते जाते बदनामी हमको दे गए
सामने से वार करते तो अफसोस ना था
गिरगिट की तरह रंग बदल पीछे से वार कर गए
#आर्यवर्त