र*एक तमन्ना*
रात की तन्हाई में ....
चांद से गुफतगु हुई.
कोई अल्फाझ नहीं ..
कोई आवाज नही.
चूपके से तेरे सांसो की धडकन सूनी.
होले होले ...
उस तन्हाई मे..
हलका सा शोर सूना..
अहसासों के समुन्दर मे
जज्बात का तूफान सूना,
बह गई.. तूम्हारे संग..
तूम्हारी बांहो में आकर ..
लबो से तूम्हारे लब छुं लुं
सारी हकीकत बयां होगी
सांसो की सरगम में गुंजता एक नाम
वो नाम के साथ जूडी जिंदगी..
हसीन ख्वाब सी लगती..
कभी डरती..
कहीं ये साथ.. छूट गया तो..
शायद जीना ही दुश्वार हो जाये ।
उसके साथ ..
जगी..
एक तमन्ना..
तुझसे पहले ..आंखें मेरी बंध हो..
तेरी बाहोंमे आखिरी सांस हो।
"काजल"
किरण पियुष शाह