सपने भी कितने प्यारे होते हैं,
सोने में ही सही कभी बहुत खुशी देते हैं,
कभी इतना हमको अमीर बना देते
कि हीरे पहन स्वर्ण महलों में रहते हैं।
सपने भी कितने न्यारे होते हैं,
जिनको नहीं देखा कभी उनसे भी मिलते हैं,
पुरानी हवेली और महलों को देख
कभी-कभी तो सोने में भी हम डरते हैं।
कुछ सपने भविष्य के दर्पण होते हैं,
क्या होगा आगे चलकर हमसे सब वह कहते हैं,
आने वाले खुशी है या गम को भी
कभी-कभी स्वप्न में चित्रित सब कुछ करते हैं।
कहते हैं प्रात का सपना सच्चा होता,
जो देखो तुम सुबह के सपने में वह सच्चा होता है।
कहता ओम यह विचारों का ताना-बाना,
जो तुम दिन में सोचते रहते वही स्वप्न में होता है।।
ओम प्रकाश श्रीवास्तव ओम