आँचल
माँ, कहाँसे लाऊ वो आँचल तेरा, जिसमे मैं एक बार और छुप जाऊ;
रेशमी नहीं, सूती था, पर सुकून गहरा था, वो सुकून अब कहाँ से लाऊ
आंसू तू पोछती थी मेरे, वो आँचल और तेरे हाथ कहाँसे लाऊ,
आज वो सुकून चाहती हूं, अब वो सुकून कैसे और कहाँसे पाऊ
दुनियां में तेरे आँचल की छांव अब रही नहीं, तो वो सुख अब कैसे पाऊ
वो अंचल जिसके लिए मै तरस रही हूं, वो छाव अब कहाँसे लाऊ ???
Armin Dutia Motashaw