Hindi Quote in Poem by અધિવક્તા.જીતેન્દ્ર જોષી Adv. Jitendra Joshi

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*‘तुझे... देखूँ’*


तुझे नदी और सरोवर में  रोशनी-सा उतरता देखूं,
तुझे उपवन के गुलों में  खुशबू-सा महकता देखूं ।

मेरे बाहों में तेरा होना ये एहसास मैं रोज़ करता हूं,
कभी जल बिन मछली-सा खुद को तड़पता देखूं ‌।

जब खुद को मैं कभी अकेलापन महसूस करता हूं,
तब दिल के एक कोने में तुझे मैं सदा धड़कता देखूं ।

रात के अंधेरे में गगन में सारा सन्नाटा छा गया है,
इन सन्नाटों में खुद को सितारों-सा टमटमता देखूं ।

तेरे और मेरे बिच में जमीन-आसमान-सी दुरियां है,
फ़िर भी चित्त सागर में तुझे प्यार-सा छलकता देखूं ।

जिस रास्ते से अक्सर जो मैं पवन-सा गुजरता हूं,
तेरे घर के आगे खड़े होकर मन को मचलता देखूं ।

यह अच्छा ही हुआ कि तुम भीतर मुझे मिल गएं,
तेरे हसिन चेहरे पे भाव संचालनों को टहलता देखूं ।

    *-- जितेन्द्रकुमार बि. बिलवाल*
               
                      

Hindi Poem by અધિવક્તા.જીતેન્દ્ર જોષી Adv. Jitendra Joshi : 111708495
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