सभी मित्रों के सामने प्रस्तुत है मेरी एक नई सजल सादर समीक्षा हेतु 🙏🙏🙏🙏
सजल
रोती आँखें सबको गम है।
लूट रहे उनमें दमखम है।।
अट्टहास वायरस है करता,
सबकी आँखों में डर-सम है।
आक्सीजन की नहीं व्यवस्था,
देख सिलेंडर में अब बम है।
धूम मची है नक्कालों की,
उखड़ी साँसें निकला दम है।
बन सौदागर खड़े हुए अब,
कोई रहा नहीं हमदम है ।
लाशों का अंबार लग रहा,
मानवता की आँखें नम है ।
जगह जगह दिखती हैं पंक्ति,
वैक्सीन की डोजें कम है।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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