खोज और उपलब्धि
जिस आनंद की खोज में
हम भटक रहे है
संतो के प्रवचन सुन रहे है
वहाँ नही मिलता है वह
मिलेगा तो कैसे
वह तो एक अनुभूती है
नही उसका कोई रंग रूप आकार
वह महसूस होता है
हृदय से आत्मा तक
आनंद के लिये चाहिए
प्रेम और सकारात्मक दृष्टिकोण
जिससे हो निरंतर नूतन सृजन
फिर होगा नया परिवर्तन
जन्म लेगी नए विचारों की एक धारा
यही विचारधारा दिखलाएगी रास्ता
गंतव्य के पथ पर हमे बढाकर
परिवर्तित करेगी जीवन की दिशा धारा