संकल्प और समर्पण
गंगा सी पवित्रता
यमुना सी स्निग्धता
सरस्वती सी वाणी
गोदावरी सी निर्मलता
नर्मदा सा कौमार्य
अलकनंदा सी चंचलता
कावेरी सी अठखेलियाँ
सिंधु सा चातुर्य
ब्रम्हपुत्र सी अलहड़ता
मंदाकिनी सी सहनशीलता
क्षिप्रा सा त्याग और तपस्या
सब मिलकर बनती है, भारत की संस्कृति
विश्व में अनूठी सभ्यता, हमे इस पर गर्व है
ये नदियाँ नही, हमारी जननी हैं
हम अपनी माँ को प्रदूषित कर रहें हैं
उसे मैला कर रहे हैं
परंपरा के नाम पर
विकास के नाम पर
विस्तार के नाम पर
अपना सारा प्रदूषण
उडे़ल रहे हैं उसके आँचल में
नदियाँ केवल नदियाँ नहीं हैं
ये हैं हमारी सुख, समृद्धि, वैभव,संस्कृति
और जीवन का आधार
हमें इन्हें बचाना है
अपना जीवन बनाना है
अपनी माँ को बचाना है
आओ हम सच्चे अंतः करण से संकल्प लें
हम प्रदूषण रोककर अक्षुण्य रखेंगे
अपनी माँ की पवित्रता
यही हो हमारी भक्ति और पूजा
यही हो हमारा संकल्प और समर्पण।