एक फूल देखा है मैंने
खिला हुआ, पवन की गति में लहराता हुआ,
एक फूल देखा है मैंने
उछलता- कूदता,अपनी मस्ती में मस्त रहता,
एक फूल देखा है मैंने
चारों ओर अपनी सुगंध फैलाता,
एक फूल देखा है मैंने
रंगो से दुनिया को रंगीन करता हुआ,
पर फूल को ही पता है
कितना है वो अंदर से मुरझाया हुआ!
-BhAkTi SoNi