सोचती हूं कई बार कि में क्यों ऐसी हूं
सोचती हूं कई बार कि में क्यों ऐसी हूं
हर बार मिलती है बेवजह ही नफरत की भेंट
बेवजह ही मिलती है बदसलूकी
सोचती हूं कई बार में Bindu 🌺
हर बार मैं ही गलत हूं
हर बार मैं ही क्यों मांगू सबसे माफी
माफी मांगने से कोई दिक्कत तो नहीं मुझे
पर मैं भी तो अपना आत्मसम्मान चाहती हूं
हर बार की तरह मैं नहीं चाहती वह अपमान
हुं मैं एक आत्मनिर्भर,आत्मसन्मानित
तो आपके अहंकार के लिए 05/11/19
में ही क्यु झुकु बार बार
सोचती हूं में कई बार,कि में ऐसे क्यों हुं
पर में जैसी भी हूं बस मैं अलग हूं l
07/05/21
क्यों जुकू में उन लोगों के सामने जिन्हें मेरी कोई कद्र ही नहीं
मुझे भी मेरा आत्मसम्मान प्रिय है, Bindu 🌺
कोई रूठ या चाहे कोई मुझे भूले
मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता
मुझे मेरी जिंदगी से प्यार है
और मैं इसे जी भर के जी लेना चाहती हूं
क्योंकि मेरी आत्मा जानती है
कि मैंने सपने में भी किसी के लिए कभी बुरा नहीं सोचा
और मेरा रब मेरे साथ है फिर क्या बात है...
( वक्त बदलने के साथ आपके विचार भी बदल जाते है....