संदल सा बदन, संगे मरमर।
आबेहयात तूं जानेजना।।
पाकर भी तुझे जो पा न सका।
शायद वो न था तेरा दीवाना।।
तूं शाम मैं है, तूं जाम मैं है।
उसके हर एक अरमान में है।।
तेरे तन की मादक सी झलक।
मरते दम तक मेरी जान में है।।
तेरा ये बदन, मानो मखमल।
तूं हर महफ़िल का अफसाना।।
जिसने पाया वो जाने तुझे।
जो न पाया वो क्या जाना।।
तेरी कंचन काया, मदहोश करे।
तेरा चांदी सा, वदन आगोश में हैं।।
तेरे उम्र की लाली का वो नशा।
तूं बोल की ठाकुर कैसे सहे।।