मै पड़ोसी हूं ,अरे वही तुम्हारे अगल बगल वाला,
तुमसे कही ज्यादा तुम्हारी जानकारी रखने वाला,
तुम कौन हो कैसे हो,इसका ठेका रखने वाला,
बाप रेे कितना तिगड़म मै लगाता हूं,
तब जाके कुछ अफवाहे फैला पाता हूं,
लेकिन हां इन अफवाहों को दिल से ना लगाना
तुम मग्ना रहो अपनी दुनिया में,
मेरे पास बहुत समय है,और मुझे भाता भी है रायता फैलाना,
मेरे कल की चाई का दूध शक्कर तुम्हे ही तो है देना,
मेरे अपने तो नजर नहीं आ रहे ,मेरा हकीम पानी तुम्हे ही है देखना,
हक है मेरा मै तुम्हारा पड़ोसी है , अरे वही तुम्हारे अगल बगल वाला,
इस अपनी धून वाली दुनिया में,तुम मेरे लिए राहत का पैग़ाम हो,
झेलते मेरा सारा तितंभा फिर भी कैसे बेजुबान हो,
हमेशा हां में ही लौटते ,कितनी सच्ची सी जान हो,
देखो क्या नसीब मैंने पाया ,कोई और भी हो सकता था सिर्फ मै ही तुम्हारा पड़ोसी बन पाया,
मेरे साथ पर्व की खुशियां तो तुम्हीं मनाते हो,
जो छा जाए मातम तो मेरे भरोसे का कंधा तुम्हीं बन जाते हो,
एक शिकायत है तुमसे,तुम अचानक क्यूं मौन हो जाते हो ,
कुछ हो जाए मतभेद तो सीधे पर्दा हो जाते हो,
तुम्हारा भी हक है ,फिर भी तुम मौन हो जाते हो,
और सब भुला के मै लग जाता हूं ,अपने कर्मो में वही पुराना वाला ,
मै पड़ोसी हूं , अरे वही तुम्हारे अगल बगल वाला......