सुगम रास्ते कभी मंज़िले हुआ नहीं करती हैं।
दुर्लभ रास्ते कोई जाता नहीं है।
कहने को तो हर आशिक़ चाँद-तारों की बात करता है।
मगर कोई लाता नही है।
ये रिश्ते ये दोस्त ये समाज के लोगों की भीड़ रहती है।
छोड़ देते हैं साथ कोई निभाता नहीं है।
यूँ तो लोग मौका ढूढते हैं उनके पास आने के लिए मगर।
मेरा घर है खाली कोई आता नहीं है।
हर इंसान दकियानूसी रिवाज़ों से मुँह मोड़ना चाहता है
कोई नया रास्ता दिखाता नहीं है।
मेरे हमदम कुत्तों को खाना खिला कर सुकून खोजते हैं।
कोई गरीब को खाना खिलाता नही है।