हे मेरे प्यारे *रामजी* 🙏
जानता हू की आप हम पृथ्विवासीओ से इस कदर नाराज है की, *आपने हमारे लिए मन्दिरके दरवाजे खुद बंध कर दिए है*,
आजके जमानेने *रावणो* की कमी नही है और आजकी *सीता* को *लक्ष्मण* रेखामे रहना पसंद नही। हरेक इन्सानके दस दस अलग अलग चहेरे है ।
आप तो *मर्यादा पुरुषोत्तम* है मगर हम तो बेशर्म, निकम्मे और एक नम्बरके ऐयास है। आपतो बंदरको भी गले लगाते थे हम तो खुदके भाईको भी नफरत करते है ।
हे प्रभू list बहोत लंबी है मगर हमारे पास time कहा है, आपको तो हम आपत्ति होती है तभी याद करते है ।।
हे प्रभू हमे माफ कर दे और मंदिरके दरवाजे खोल दे ।
जयश्री राम । रामनवमीकी ढेर सारी शुभकामनाएं 🙏🙏🙏
#priten 'screation#