*किसी भी क्षेत्र में चाहे घर - परिवार हो , समाज या राष्ट्र हो , हर जगह तालमेल की जरुरत होती है* । यदि आपस में तालमेल बिठाना आ गया तो जीवन खुशियों से भर जाएगा । *यह तालमेल की स्थिति तभी बन पाती है जब इंसान के अंदर सदगुण और अच्छे संस्कार होते हैं* । यदि वह शुभ संस्कारों में संस्कारित नहीं हुआ तो उसकी सभी जगह तू - तू मैं - मैं होती रहेगी और इसी में वह अपने जीवन का अमूल्य समय व्यर्थ गंवा देगा इसलिए जरुरी है कि इंसान में सदगुणों और शुभ संस्कारों के बीज डाले जाएं । *जिनमें यह गुण आ जाते हैं वह समाज में सम्मान के अधिकारी बन जाते हैं और समाज उनकी प्रशंसा के गीत गाता है । उन्हें ही सभ्य , शिष्ट और संस्कारवान कहा जाता है* । " सुप्रभात जी "
।। जय सियाराम जी ।।