By courtesy:- rekhta
जान अगर हो जान तो क्यूँ-कर न हो तुझ पर निसार
दिल अगर हो दिल तिरी सूरत पे शैदा क्यूँ न हो
........हसन बरेलवी
अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ
अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता तुम हो जाता हूँ
...........अनवर शऊर
अपनी ज़बाँ से कुछ न कहेंगे चुप ही रहेंगे आशिक़ लोग
तुम से तो इतना हो सकता है पूछो हाल बेचारों का
.............इब्न-ए-इशा
कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन
फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर
.........निदा फाजली