स्त्री
कुदरत ने स्त्री को सर्जन करके हमारी कुदरत को एक ऐसा करिश्मा दिया है जो दुनिया को संभालने लगती है.
चाहे वह बेटी के स्वरूप में हो मां के स्वरूप में हो बहू के स्वरूप में हो दादी के स्वरूप में हो यह सरस्वती के स्वरूप में हो इस दुनिया का सर्जन संभालने वाली स्त्री है.
नहीं उसे पुरुष समझ सकता है नहीं यह दुनिया समझ सकती है.
स्त्री का मान सम्मान इज्जत उसको देना हमारा कर्तव्य है हमारा जुनून भी होना चाहिए और स्त्री को साथ देने के लिए हम को एकजुट होकर स्त्री को आगे बढ़ाना चाहिए नहीं के उसका अपमान करना चाहिए.
हमारी सोच मैं बदलाव आएगा बदलाव आएगा स्त्री को कमजोर मत समझो स्त्री में जो ताकत है वह पुरुष में नहीं है स्त्री के हाथ में दुनिया संभालने दे दोगे ना तो दुनिया में से पाप निकल जाएगा.
मेरी सोच मेरे तक ही सीमित नहीं है हम सब को समझना है.