ये इश्क की नगरी भुल भलैया सी हैं।
एकबार जो नगरी मे आया वापस नही लौटेगा।
हर पल, हर साँस, हर दिन किसी और के
लिए जीना पडता हैं।
इश्क के सारे रश्मो रिवाजो से चलना पडता हैं,
किसी और के लिए,
अपने दिल मे बस के अपना सारा सुख चैन छिन
लेता हैं।
फिर भी,
किसी और के लिए जीना भी अपना सा लगता हैं
ये इश्क की नगरी हैं यारो.......