बहोत दिनों से मन उलझनों में फ़सा हुआ है कि आखिर क्या चाहते है लोग.... जो खुद से खुद को नही संभल पाते और नए नए रिश्ते बनाते ही जाते है.... पुराने रिश्तो में दरार पड़ती है लेकिन न कोई मल्हम ना कोई पछतावा या ना ही कोई रिश्ता बचाने की पहल...... लेकिन क्यु ??????
-Shree...Ripal Vyas