मैने बिताए है कई लम्हे गम-ए-तन्हाई में..
और जिया है सूनापन तन्हा रातों में..
रोक लिए कई आसूं जमी पर गिरने से पहले,
अपना लिया गम को यूँ दिल से ही..
नहीं समझ पाए तुम खामोश, बेबस निगाहों को,
जो देख रही थी इतने करीब से तुम्हें दूर जाते हुए..
तुम सुन नहीं पाए वो आवाज मेरे दिल की
जो सिर्फ तुम्हारा ही हो जाना चाहती थी..
पर तुम कैसे जान लेते हाल-ए-दिल,
भला दर्द दिलों का कौन जान पाता है दिल से ...
-Sarita Sharma