मंजिल पाने का हौसला जान पर खेल रहा था ,
ख्वाहिश का बोझ सफर में लिए घूमता फिर रहा था।
भटका इंसान इश्क में घर से बेघर होने जा रहा था,
खुदा था सामने बैठा मजाल क्या मौत की अंगड़ाई जो ले रहा था।
तबाह हूआ इश्क फनाह हो कर भी जीने को मचल रहा था,
शायराना अंदाज कुछ इस तरह दुनिया में कायम कर रहा था।
DEAR ZINDAGI 💞🌹