प्राण-प्राण में भारत भाषा
प्राण-प्राण में भारत उजला,
प्राण-प्राण में स्नेह सिन्धु हो
प्राण-प्राण में वृक्ष हरे।
प्राण-प्राण में वायु शुद्ध हो
प्राण-प्राण में हिन्द हृदय हो,
उत्तुंग श्रृंग तक बढ़े हुये पग
श्री रामसेतु तक शिव के अंश।
प्राण-प्राण में परिचर्चा हो
प्राण-प्राण में जय का तत्व,
प्राण-प्राण में विजय शान्ति हो
प्राण-प्राण में जीवन सत।
* महेश रौतेला